महिला सशक्तिकरण

 



हम महिला सशक्तिकरण के युग में जी रहे हैं। पूरी दुनिया में आज महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। वे अब हर तरह से अपने जीवन एवं व्यवसाय से संबंधित निर्णय स्वयं लेने के लिए सशक्त हो चुकी हैं।


महिला सशक्तिकरण के लाभ:


महिलाओं को एक सार्थक एवं उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने का आत्मविश्वास दिलाने को ही सही मायनों में महिला सशक्तिकरण कहते हैं। यह दूसरों पर उनकी निर्भरता समाप्त करते हुए उन्हें अपने आप में ही सबल बनाने का प्रयास है।



  • महिला सशक्तिकरण महिलाओं को गरिमा और स्वतंत्रता के साथ अपने जीवन का नेतृत्व करने में सक्षम बनाता हैं।

  • यह उनका आत्म सम्मान बढ़ाता है।

  • इसकी वजह से उन्हें एक अलग पहचान मिलती है।

  • वे समाज में सम्मानित पदों को प्राप्त करने में कामयाब होती हैं।

  • वे वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर होती हैं और इस वजह से अपनी इच्छाओं एवं आवश्यकताओं के अनुरूप खर्च कर पाती हैं।

  • वे समाज के कल्याण के लिए सार्थक योगदान दे सकती हैं।

  • वे सक्षम नागरिक बनती हैं और देश के सकल घरेलू उत्पाद को बढ़ाने में सहयोग कर पाती हैं।

  • वे देश के संसाधनों में उचित एवं न्यायसंगत हिस्सा प्राप्त करने में कामयाब होती हैं।


महिला सशक्तिकरण की आवश्यकता:



  • बिना महिला सशक्तिकरण के हम अन्याय, लिंग-भेद और असमानताओं को दूर नहीं कर सकते।

  • अगर महिलाएं सशक्त नहीं हैं तो उन्हें जीवन में सुरक्षा और संरक्षण का आनंद प्राप्त नहीं हो सकता।

  • इससे उन्हें कार्य करने के लिए सुरक्षित वातावरण प्राप्त होता है।

  • महिलाओं के शोषण और उत्पीड़न के खिलाफ सशक्तिकरण एक शक्तिशाली औजार के रूप में कार्य करता है।

  • यह महिलाओं के लिए पर्याप्त कानूनी संरक्षण प्रदान करने का एक बड़ा साधन है।

  • अगर सामाजिक और आर्थिक रूप से महिलाएं सशक्त नहीं की गईं तो वे अपनी खुद की पहचान का विकास नहीं कर पाएंगी।

  • अगर महिलाओं को रोजगार प्रदान नहीं किया गया तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा क्योंकि महिलाएं दुनिया की आबादी का एक विशाल हिस्सा हैं।

  • महिलाएं बेहद रचनात्मक और बुद्धिमान होती हैं और इस वजह से सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों में उनका योगदान प्राप्त करना जरूरी है।

  • एक न्यायसंगत एवं प्रगतिशील समाज के लिए महिलाओं को कार्य के समान अवसर प्रदान किए जाने की आवश्यकता है।


महिला सशक्तिकरण के साधन:


शिक्षा: उचित और पर्याप्त शिक्षा के बिना, महिलाओं को सशक्त व्यक्तित्वों में परिवर्तित नहीं किया जा सकता। उन्हें उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए ताकि वे एक ज्ञानवान समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।


संचार कौशाल: प्रभावी संचार कौशल के विकास के  बिना, महिलाएं अपनी आवाज बुलंद नहीं कर सकतीं। सफल होने के लिए उनका प्रभावी ढंग से संवाद कर पाना उनके लिए जरूरी है। एक परिवार, टीम या कंपनी को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के लिए, नेताओं के रूप में, उन्हें लोगों को अपनी बात समझाने की आवश्यकता है।


प्रयोज्य आय: महिलाओं के जीवन में महत्वपूर्ण वित्तीय फैसलों में उनकी भी सुनी जाए इसके लिए उन्हें अच्छा कमाने की आवश्यता है। वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर महिला हमारे जीवन एवं हमारे कारोबार के विकास में भी अपना यागदान देती है।


इंटरनेट की शक्ति: इंटरनेट की उपलब्धता ने महिलाओं के सामाजिक संपर्क के दायरे में वृद्धि करने के साथ ही उनके ज्ञान एवं जागरूकता का भी विकास किया है। दुनिया भर में फैले इटरनेट ने महिलाओं से संबंधित सभी वर्ज्य, मिथकों और उनके बारे में प्रचलित गलत धारणाओं को समाप्त कर दिया है।


निष्कर्ष: महिला सशक्तिकरण द्वारा समाज और दुनिया को रहने के लिए एक बेहतर जगह बनाने में मदद मिलती है और साथ ही यह समावेशी भागीदारी के रास्ते पर आगे चलने में सहायता करता है। इसका मतलब यह है कि ऐसे परिवार एवं संगठन की खुशियों में वृद्धि होती है जहां महिलाओं का प्रभाव होता है।