नवम्बर माह का प्रादर्श - “सोई प्लोंग”
इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय के अंतरंग भवन वीथि संकुल में आज “माह के प्रादर्श” श्रृंखला के अंतर्गत माह नवम्बर 2019 के प्रादर्श के रूप में इनथोंग, तिनसुखिया (असम) में महिलाओं द्वारा पहने जाने वाले जैकेट “सोई प्लोंग” का उदघाटन संग्रहालय के निदेशक, प्रो. सरित कुमार चौधुरी द्वारा किया गया। इस अवसर पर श्री दिलीप सिंह (संयुक्त निदेशक, मानव संग्रहालय) एवं अनेक गणमान नागरिक उपस्थित थे। इस प्रादर्श का संकलन एवं संयोजन श्री श्रीकांत गुप्ता (संग्रहालय एशोसिएट) द्वारा किया गया है।
इस अवसर पर श्री गुप्ता ने बताया कि प्रदर्शित प्रादर्श एकप्रतिष्ठित महिला द्वारा सजाया हुआ जैकेट है। जिसे जनजाति महिला सदस्यों द्वारा प्रतिष्ठित उत्सवों में परिधान के रूप में पहना जाता है। यह परिधान सामाजिक-सांस्कृातिक और धार्मिक महत्व को दर्शाता है जोकि स्थानीय संस्कृति के साथ मिश्रित होकर दूर-दूर तक फैल रहा है। पारंपरिक रूप से काले मखमल के कपड़े से तैयार इस पूरे बाँह के जैकेट को वयस्क महिला समूहों द्वारा त्योहारों और विवाह जैसे समारोहों के अवसर एक जातीय परिधान के रूप में पहना जाता है। एक महत्वपूर्ण परिधान के रूप में पहने जाने वाले इस काले मखमली कपड़े में सफेद धातु के बकल और लटकन से सजाकर उसका उपयोग किया जाता है। परंपरागत रूप से, चांदी का उपयोग ही इस तरह की सजावट के लिए किया जाता था, लेकिन पिछले कुछ दशकों में चाँदी की जगह सोइ नामक मिश्रित सफेद धातु ने ले लिया है जो चीन और म्यांमार से आता है। वर्तमान में सोइ धातु के बकल स्थानीय बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं। कपड़े में बकल और लटकन का उपयोग भी किसी व्यक्ति या परिवार की सपंन्नता और आर्थिक स्थिति का संकेत देता है।
चित्रकार कार्यशाला – भीमबेटका में
'विश्व विरासत सप्ताह' के अवसर पर इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली तथा इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्राहालय, भोपाल के संयुक्त तत्त्वाधान में दिनांक 20-22 नवम्बर 2019 तक एक त्रिदिवसीय राष्ट्रीय चित्रकार कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यशाला प्रसिद्ध पुरातत्त्ववेत्ता, कलाविद् तथा भीमबेटका के खोजकर्ता पद्मश्री डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर के शताब्दी वर्षोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित हो रही है। डॉ. वाकणकर को भारतीय शैलचित्रकला का 'पितामह' कहा जाता है। कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 20 चित्रकार सम्मिलित होंगे जो भीमबेटका के पुराचित्रों की कॉपी कैनवास पर चित्रित करेंगे।इन चित्रों को भविष्य में प्रदर्शनी के माध्यम से देश के विभिन्न स्तनों पर प्रदर्शित किया जायेगा जिससे आम-जनमानस को पूर्वजों की धरोहर भीमबेटका के प्रति जागरूक किया जा सके।